Dost
तुम्हारी इस अदा का क्या जवाब डू,
अपने दोस्त को क्या उफर डू,
कोई अछा सा फूल होता तो माली से मँगवाते,
जो खुद गुलाब है उसको क्या गुलाब डू…
रब ने जब तुझे बनाया होगा
एक सुरूर उसके दिल में आया होगा,
सोचता होगा क्या दूँगा तोहफे में तुझे,
तब उसने मुझे बनाया होगा.
काश हम स्मस होते,
एक क्लिक में तुम्हारे पास होते,
भले तुम हमे डेलीट कर देते,
पर कुछ पल के लिए हम तुम्हारा एहसास तो होते!
तन्हाईओं मे उनको ही याद करते हैं,
वो सलंत रहे यही फरियाद करते है,
हम उनके ही मोहब्बत का इंतज़ार करते है,
उनको क्या पता हम उनसे कितना प्यार करते है.
एक दिन हमारे अंन्सून हुंसे पूच बैठे,
हुमे रोज़ -रोज़ क्यों बुलाते हो,
हुँने कहा हम याद तो उन्हे करते हैं तुम क्यों चले आते हो.
हर फूल की अजब कहानी है,
चुप रहना भी प्यार की निशानी है,
कहीं कोई ज़ख़्म नई फिर भी क्यूँ दर्द का एहसास है,
लगता है दिल का एक टुकड़ा आज भी उसके पास है
किस्मत पर ऐतबार किसको है,
मिल जाए खुशी इनकार किसको है,
कुछ मजबूरियाँ हैं मेरे दोस्त,
वरना जुदाई से प्यार किसको है
कल मिला वक़्त तो ज़ूलफें तेरी सुलझा दूँगा,
आअज उलझा हून ज़रा वक़्त को सुलझाने में,
यूँ तो सुलझ जाती हैं उलझी ज़ूलफें,
उमर काट जाती है वक़्त को सुलझाने में.
डरते है आग से कही जल ना जाए
डरते है ख्वाब से कहीं टूट ना जाए
लेकिन सबसे ज़ियादा डरते है आपसे
कहीं आप ह्यूम भूल ना जाए
तुम्हारी इस अदा का क्या जवाब डू,
अपने दोस्त को क्या उफर डू,
कोई अछा सा फूल होता तो माली से मँगवाते,
जो खुद गुलाब है उसको क्या गुलाब डू…
रब ने जब तुझे बनाया होगा
एक सुरूर उसके दिल में आया होगा,
सोचता होगा क्या दूँगा तोहफे में तुझे,
तब उसने मुझे बनाया होगा.
काश हम स्मस होते,
एक क्लिक में तुम्हारे पास होते,
भले तुम हमे डेलीट कर देते,
पर कुछ पल के लिए हम तुम्हारा एहसास तो होते!
तन्हाईओं मे उनको ही याद करते हैं,
वो सलंत रहे यही फरियाद करते है,
हम उनके ही मोहब्बत का इंतज़ार करते है,
उनको क्या पता हम उनसे कितना प्यार करते है.
एक दिन हमारे अंन्सून हुंसे पूच बैठे,
हुमे रोज़ -रोज़ क्यों बुलाते हो,
हुँने कहा हम याद तो उन्हे करते हैं तुम क्यों चले आते हो.
हर फूल की अजब कहानी है,
चुप रहना भी प्यार की निशानी है,
कहीं कोई ज़ख़्म नई फिर भी क्यूँ दर्द का एहसास है,
लगता है दिल का एक टुकड़ा आज भी उसके पास है
किस्मत पर ऐतबार किसको है,
मिल जाए खुशी इनकार किसको है,
कुछ मजबूरियाँ हैं मेरे दोस्त,
वरना जुदाई से प्यार किसको है
कल मिला वक़्त तो ज़ूलफें तेरी सुलझा दूँगा,
आअज उलझा हून ज़रा वक़्त को सुलझाने में,
यूँ तो सुलझ जाती हैं उलझी ज़ूलफें,
उमर काट जाती है वक़्त को सुलझाने में.
डरते है आग से कही जल ना जाए
डरते है ख्वाब से कहीं टूट ना जाए
लेकिन सबसे ज़ियादा डरते है आपसे
कहीं आप ह्यूम भूल ना जाए